श्री कुबेर चालीसा
श्री कुबेर चालीसा ॥ दोहा ॥ जैसे अटल हिमालय, और जैसे अडिग सुमेर ।ऐसे ही स्वर्ग द्वार पै, अविचल खड़े कुबेर ॥विघ्न हरण मंगल करण, सुनो शरणागत की टेर ।भक्त हेतु वितरण करो, धन माया के ढ़ेर ॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय जय श्री कुबेर भण्डारी । धन माया के तुम अधिकारी ॥१॥तप तेज […]
श्री सीता माता चालीसा
श्री सीता माता चालीसा ॥ दोहा ॥ बन्दौ चरण सरोज निज जनक लली सुख धाम ।राम प्रिय किरपा करें सुमिरौं आठों धाम ॥कीरति गाथा जो पढ़ें सुधरैं सगरे काम ।मन मन्दिर बासा करें दुःख भंजन सिया राम ॥ ॥ चौपाई ॥ राम प्रिया रघुपति रघुराई । बैदेही की कीरत गाई ॥१॥चरण कमल बन्दों सिर नाई । सिय सुरसरि […]
श्री छिन्मस्तिका चालीसा
श्री छिन्मस्तिका चालीसा ॥ दोहा ॥ अपना मस्तक काट कर, लीन्ह हाथ में थाम ।कमलासन पर पग तले, दलित हुए रतिकाम ॥जगतारण ही काम है, रजरप्पा है धाम ।छिन्नमस्तका को करूं, बारंबार प्रणाम ॥ ॥ चौपाई ॥ जय गणेश जननी गुण खानी । जयति छिन्नमस्तका भवानी ॥१॥गौरी सती उमा रुद्राणी । जयति महाविद्या कल्याणी ॥२॥सर्वमंगला मंगलकारी । […]
श्री नरसिंह चालीसा
श्री नरसिंह चालीसा ॥ दोहा ॥ मास वैशाख कृतिका युत, हरण मही को भार ।शुक्ल चतुर्दशी सोम दिन, लियो नरसिंह अवतार ॥धन्य तुम्हारो सिंह तनु, धन्य तुम्हारो नाम ।तुमरे सुमरन से प्रभु, पूरन हो सब काम ॥ ॥ चौपाई ॥ नरसिंह देव में सुमरों तोहि । धन बल विद्या दान दे मोहि ॥१॥जय जय नरसिंह […]
श्री आदिनाथ चालीसा
श्री आदिनाथ चालीसा ॥ दोहा॥शीश नवा अरिहंत को,सिद्धन को, करूं प्रणाम ।उपाध्याय आचार्य का,ले सुखकारी नाम ॥ सर्व साधु और सरस्वती,जिन मन्दिर सुखकार ।आदिनाथ भगवान को,मन मन्दिर में धार ॥ ॥ चौपाई ॥ जै जै आदिनाथ जिन स्वामी ।तीनकाल तिहूं जग में नामी ॥ वेष दिगम्बर धार रहे हो ।कर्मो को तुम मार रहे हो […]
श्री भैरव चालीसा
श्री भैरव चालीसा ॥ दोहा ॥श्री गणपति गुरु गौरी पदप्रेम सहित धरि माथ ।चालीसा वंदन करोश्री शिव भैरवनाथ ॥ श्री भैरव संकट हरणमंगल करण कृपाल ।श्याम वरण विकराल वपुलोचन लाल विशाल ॥ ॥ चौपाई ॥जय जय श्री काली के लाला ।जयति जयति काशी-कुतवाला ॥ जयति बटुक-भैरव भय हारी ।जयति काल-भैरव बलकारी ॥ जयति नाथ-भैरव विख्याता […]
श्री गंगा चालीसा
श्री गंगा चालीसा ॥ दोहा ॥जय जय जय जग पावनी,जयति देवसरि गंग ।जय शिव जटा निवासिनी,अनुपम तुंग तरंग ॥ ॥ चौपाई ॥जय जय जननी हराना अघखानी ।आनंद करनी गंगा महारानी ॥जय भगीरथी सुरसरि माता ।कलिमल मूल डालिनी विख्याता ॥जय जय जहानु सुता अघ हनानी ।भीष्म की माता जगा जननी ॥धवल कमल दल मम तनु सजे […]
माँ काली चालीसा
माँ काली चालीसा ॥दोहा॥जयकाली कलिमलहरण,महिमा अगम अपार ।महिष मर्दिनी कालिका,देहु अभय अपार ॥ ॥ चौपाई ॥अरि मद मान मिटावन हारी ।मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥अष्टभुजी सुखदायक माता ।दुष्टदलन जग में विख्याता ॥भाल विशाल मुकुट छवि छाजै ।कर में शीश शत्रु का साजै ॥दूजे हाथ लिए मधु प्याला ।हाथ तीसरे सोहत भाला ॥चौथे खप्पर खड्ग […]
श्री सरस्वती चालीसा
सरस्वती चालीसा ॥ दोहा ॥जनक जननि पद्मरज,निज मस्तक पर धरि ।बन्दौं मातु सरस्वती,बुद्धि बल दे दातारि ॥ पूर्ण जगत में व्याप्त तव,महिमा अमित अनंतु।दुष्जनों के पाप को,मातु तु ही अब हन्तु ॥ ॥ चालीसा ॥जय श्री सकल बुद्धि बलरासी ।जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ॥जय जय जय वीणाकर धारी ।करती सदा सुहंस सवारी ॥रूप चतुर्भुज धारी […]
